बुआ जी चिकित्सालय के स्वामी डॉ के विजय बने धन कुबेर के स्वामी अधिकारियों के समर्पण से। शमशी अज़ीज

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जौनपुर में अनेकों निजी चिकित्सालय प्रशासन के आशीर्वाद स्वरूप अवैध रूप से खुलेआम फलफूल रहे है जिसमे किसी भी नियमो व आदेशो का पालन न के समान है ऐसे निजी चिकित्सालयों के चिकित्सक स्वयं को बाहुबली होने का परिचय दे रहे है यूँ तो चिकित्सको को भगवान की उपाधि प्राप्त है परंतु ऐसे चिकित्सकों की कार्यप्रणाली से ही उन्हें मौत के सौदागर के रूप में देखने पर विवश हो रहे नगर वासी इससे तो यही प्रतीत होता है कि ऐसे चिकित्सको के सशक्तिकरण के निर्माण में मुख्य भूमिका उच्च अधिकारियों की ही होती रही है आज जिस प्रकार स्वयं के चिकित्साले को प्रसिद्ध करने के लिये चिकित्सक नगर के चर्चित चिकित्सको का नाम अंकित कर रोगियों का चीरफाड़ करते रहते है मानो जैसे रोगी ATM यंत्र हो सूत्रों से ज्ञात भी होता रहता है कि ऐसे अनेको चिकित्सालय है परन्तु मानक से अत्यधिक विपरीत कार्य बुआ जी चिकित्सालय में होता है जिससे वे अपनी योजना अनुसार कार्य कर करोड़ो धन व भूमियों के स्वामी बन चुके है बुआ जी चिकित्सालय के संचालक व स्वामी डॉ के विजय जौनपुर सदर चिकित्सालय में कार्यरत होते हुए भी स्वयं के चिकित्सालय को अपना समय अर्पित करते रहे तथा सरकार को धोखा देते हुए चूना लगाते रहे डॉ के विजय जिस प्रकार सरकारी सेवा की आड़ में निजी सेवा को प्रबल करते हुए अपने कुछ ही समय मे आलीशान बुआ जी चिकित्सालय का निर्माण कर बैठे तथा अपने चिकित्सालय के प्रचार प्रसार के लिये अनेको असिस्टेंट रूपी दलाल नगर वासियो के बीच भेजते रहे जिससे बुआ जी चिकित्सालय कुछ ही समय मे उच्च स्तरीय चिकित्सालयों में अंकित हो गया सूत्रों से ये भी ज्ञात हुआ है कि डॉ के विजय के विरुद्ध शिकायत भी जाते रहे है व प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR ) भी की गई परंतु फिर भी डॉ के विजय पर कोई ठोस कार्यवाही नही हो सकी साथ ही डॉ के विजय अपने धन की शक्ति का प्रमाण देते हुए ऐसे सभी आरोपो को झूठा साबित कर अपने स्वेत वस्त्र पर लेमिनेशन कराते रहे।जिससे ये स्पष्ट हो जाता है कि समस्त उच्च अधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ के विजय जी के हाथों की कठपुतली मात्र है।

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